ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5656.1वाल्मीकि रामायण 56.1ततस्तु शिंशुपामूले जानकीं पर्यवस्थिताम् । अभिवाद्याब्रवीद्दिष्ट्या पश्यामि त्वामिहाक्षताम् ।। 5.56.1 ।।।।अगलापूरा अध्याय