ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5656.17वाल्मीकि रामायण 56.17कूटैश्च बहुधाकीर्णैः शोभितं बहुकन्दरैः । सालतालाश्वकर्णैश्च वंशैश्च बहुभिर्वृतम् ।। 5.56.17 ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय