ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5555.14वाल्मीकि रामायण 55.14किमग्नौ निपताम्यद्य अहोस्विद्वडवामुखे । शरीरमाहो सत्त्वानां दद्मि सागरवासिनाम् ।। 5.55.14 ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय