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वाल्मीकि रामायण 54.9

ततो ऽन्यत् पुप्लुवे वेश्म महापार्श्वस्य वीर्यवान् ।
मुमोच हनुमानग्निं कालानलशिखोपमम् ।। 5.54.9 ।।।।

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