ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5454.8वाल्मीकि रामायण 54.8अवप्लुत्य महावेगः प्रहस्तस्य निवेशनम् । अग्निं तत्र स निक्षिप्य श्वसनेन समो बली ।। 5.54.8 ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय