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वाल्मीकि रामायण 54.32

ततस्तु लङ्कापुरपर्वताग्रे समुत्थितो भीमपराक्रमो ऽग्निः ।
प्रमार्य चूडावलयं प्रदीप्तो हनूमता वेगवता विसृष्टः ।। 5.54.32 ।।।।

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