ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5454.21वाल्मीकि रामायण 54.21श्वसनेन च संयोगादतिवेगो महाबलः । कालाग्निरिव जज्वाल प्रावर्धत हुताशनः ।। 5.54.21 ।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय