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वाल्मीकि रामायण 54.20

प्रदीप्तमग्निमुत्सृज्य लाङ्गूलाग्रे प्रतिष्ठितम् ।
ननाद हनुमान् वीरो युगान्तजलदो यथा ।। 5.54.20 ।।।।

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