Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 53.33

हनुमज्जनकश्चापि पुच्छानलयुतो ऽनिलः ।
ववौ स्वास्थ्यकरो देव्याः प्रालेयानिलशीतलः ।। 5.53.33।।।।

पूरा अध्याय