ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 5353.15वाल्मीकि रामायण 53.15अवश्यमेव द्रष्टव्या मया लङ्का निशाक्षये । । 5.53.15।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय