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वाल्मीकि रामायण 51.35

तदलं कालपाशेन सीताविग्रहरूपिणा ।
स्वयं स्कन्धावसक्तेन क्षममात्मनि चिन्त्यताम् ।। ५.५१.३५।।।।

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