ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 4848.33वाल्मीकि रामायण 48.33तावुभौ वेगसम्पन्नौ रणकर्मविशारदौ । सर्वभूतमनोग्राहि चक्रतुर्युद्धमुत्तमम् ।। ५.४८.३३।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय