ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 4646.27वाल्मीकि रामायण 46.27तं विरूपाक्षयूपाक्षौ दृष्ट्वा निपतितं भुवि । सञ्जातरोषौ दुर्धर्षावुत्पेततुररिन्दमौ ।। ५.४६.२७।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय