ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 4646.26वाल्मीकि रामायण 46.26ततः स मथिताष्टाश्वं रथं भग्नाक्षकूबरम् । विहाय न्यपतद्भूमौ दुर्धरस्त्यक्तजीवितः ।। ५.४६.२६।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय