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वाल्मीकि रामायण 45.2

महाबलपरीवारा धनुष्मन्तो महाबलाः ।
कृतास्त्रास्त्रविदां श्रेष्ठाः परस्परजयैषिणः ।। ५.४५.२।।।।

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