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वाल्मीकि रामायण 41.6

न ह्येकः साधको हेतुः स्वल्पस्यापीह कर्मणः ।
यो ह्यर्थं बहुधा वेद स समर्थो ऽर्थसाधने ।। ५.४१.६।।।।

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