ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 3838.65वाल्मीकि रामायण 38.65यथा हि वानरश्रेष्ठ दुःखक्षयकरो भवेत् । त्वमस्मिन् कार्यनिर्योगे प्रमाणं हरिसत्तम ।। ५.३८.६५।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय