ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 3737.43वाल्मीकि रामायण 37.43अहमाकाशमापन्ना ह्युपर्युपरि सागरम् । प्रपतेयं हि ते पृष्ठाद्भयाद् वेगेन गच्छतः ।। ५.३७.४४।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय