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वाल्मीकि रामायण 36.42

नैव दंशान्न मशकान् न कीटान्न सरीसृपान् ।
राघवो ऽपनयेद्गात्रात् त्वद्गतेनान्तरात्मना ।। ५.३६.४२।।।।

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