ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 3636.41वाल्मीकि रामायण 36.41न मांसं राघवो भुङ्क्ते न चापि मधु सेवते । वन्यं सुविहितं नित्यं भक्तमश्नाति पञ्चमम् ।। ५.३६.४१।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय