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वाल्मीकि रामायण 35.9

तेजसा ऽ ऽदित्यसङ्काशः क्षमया पृथिवीसमः ।
बृहस्पतिसमो बुद्ध्या यशसा वासवोपमः ।। ५.३५.९।।।।

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