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वाल्मीकि रामायण 35.8

रामः कमलपत्राक्षः सर्वसत्त्वमनोहरः ।
रूपदाक्षिण्यसम्पन्नः प्रसूतो जनकात्मजे ।। ५.३५.८।।।।

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