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वाल्मीकि रामायण 35.74

कुशली तव काकुत्स्थः सर्वशस्त्रभृतां वरः ।
गुरोराराधने युक्तो लक्ष्मणश्च सुलक्षणः ।। ५.३५.७४।।।।

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