ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 3535.38वाल्मीकि रामायण 35.38तानि सर्वाणि रामाय आनीय हरियूथपाः । संहृष्टा दर्शयामासुर्गतिं तु न विदुस्तव ।। ५.३५.३८।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय