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वाल्मीकि रामायण 35.37

ततस्त्वद्गात्रशोभीनि रक्षसा ह्रियमाणया ।
यान्याभरणजालानि पातितानि महीतले ।।। ५.३५.३७।।।।

पूरा अध्याय