ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 3434.24वाल्मीकि रामायण 34.24अथवा नायमुन्मादो मोहो ऽप्युन्मादलक्षणः । संबुद्ध्ये चाहमात्मानमिमं चापि वनौकसम् ।। ५.३४.२४।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय