ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 3333.3वाल्मीकि रामायण 33.3कानु पद्मपलाशाक्षि क्लिष्टकौशेयवासिनि । द्रुमस्य शाखामालम्ब्य तिष्ठसि त्वमनिन्दिते ।। ५.३३.३।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय