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वाल्मीकि रामायण 3.8

विस्मय आविष्ट हृदयः पुरीम् आलोक्य सर्वतः ।
जाम्बूनदमयैः द्वारैः वैदूर्य कृत वेदिकैः ॥५-३-८॥

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