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वाल्मीकि रामायण 3.2

निशि लन्काम् महा सत्त्वः विवेश कपि कुन्जरः ।
रम्य कानन तोय आढ्याम् पुरीम् रावण पालिताम् ॥५-३-२॥

पूरा अध्याय