ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 33.2वाल्मीकि रामायण 3.2निशि लन्काम् महा सत्त्वः विवेश कपि कुन्जरः । रम्य कानन तोय आढ्याम् पुरीम् रावण पालिताम् ॥५-३-२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय