ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 33.1वाल्मीकि रामायण 3.1स लम्ब शिखरे लम्बे लम्ब तोयद सम्निभे । सत्त्वम् आस्थाय मेधावी हनुमान् मारुत आत्मजः ॥५-३-१॥अगलापूरा अध्याय