ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2525.4वाल्मीकि रामायण 25.4सा राक्षसीमध्यगता सीता सुरसुतोपमा । न शर्म लेभे दुःखार्ता रावणेन च तर्जिता ।। ५.२५.४।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय