ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2525.3वाल्मीकि रामायण 25.3न मानुषी राक्षसस्य भार्या भवितुमर्हति । कामं खादत मां सर्वा न करिष्यामि वो वचः ।। ५.२५.३।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय