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वाल्मीकि रामायण 24.44

अथ वा न्यस्तशस्त्रौ तौ वने मूलफलाशनौ ।
भ्रातरौ हि नर श्रेष्ठौ चरन्तौ वनगोचरौ ।। ५.२४.४४।।।।

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