ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2323.4वाल्मीकि रामायण 23.4सा राक्षसी मध्यगता सीता सुरसुतोपमा । न शर्म लेभे दुःखार्ता रावणेन च तर्जिता ।। ५.२३.४।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय