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वाल्मीकि रामायण 22.42

एवं सम्भर्त्स्यमाना सा सीता सुरसुतोपमा ।
राक्षसीभिः सुघोराभिर्धैर्यमुत्सृज्य रोदिति ।। ५.२२.४२।।

पूरा अध्याय