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वाल्मीकि रामायण 22.11

ऊचुश्च परमक्रुद्धाः प्रगृह्याशु परश्वधान् ।
नेयमर्हति भर्तारं रावणं राक्षसाधिपम् ।। ५.२२.११।।।।

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