ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1919.27वाल्मीकि रामायण 19.27न हि गन्धमुपाघ्राय रामलक्ष्मणयोस्त्वया । शक्यं सन्दर्शने स्थातुं शुना शार्दूलयोरिव ।। ५.१९.२७।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय