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वाल्मीकि रामायण 19.26

आश्रमं तु तयोः शून्यं प्रविश्य नरसिंहयोः ।
गोचरं गतयोर्भ्रात्रोरपनीता त्वयाधम ।। ५.१९.२६।।।।

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