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वाल्मीकि रामायण 18.23

कामदर्पमदैर्युक्तं जिह्मताम्रायतेक्षणम् ।
समक्षमिव कन्दर्पमपविद्धशरासनम् ।। ५-१८-२३।।

पूरा अध्याय