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वाल्मीकि रामायण 17.22

वियूथाम् सिम्हसम्रुद्धाम् बद्धाम् गजवधूमिव ।
चन्द्ररेखाम् पयोदान्ते शारदाब्रैरिवावृताम् ।। ५-१७-२२।।

पूरा अध्याय