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वाल्मीकि रामायण 17.21

भूषणैरुत्तमोर्हीनाम् भर्तृवात्सल्यभूषणाम् ।
राक्षसाधिपसम्रुद्धाम् बन्धुभिश्च विना कृताम् ।। ५-१७-२१।।

पूरा अध्याय