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वाल्मीकि रामायण 17.15

हयोष्ट्रखरवक्त्राश्च राक्षसीर्घोरदर्शनाः ।
शूलमुद्गरहस्ताश्च क्रोधनाः कलहप्रियाः ।। ५-१७-१५।।

पूरा अध्याय