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वाल्मीकि रामायण 17.14

अतिमात्रस्यनेत्राश्च दीर्घजिह्वानखास्तथा ।
अजामुखीर्हस्तिमुखीर्गोमुखाः सूकरीमुखीः ।। ५-१७-१४।।

पूरा अध्याय