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वाल्मीकि रामायण 15.4

कान्चन उत्पल पद्माभिः वापीभिः उपशोभिताम् ।
बह्व आसन कुथा उपेताम् बहु भूमि गृह आयुताम् ॥५-१५-४॥

पूरा अध्याय