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वाल्मीकि रामायण 15.3

ताम् स नन्दन सम्काशाम् मृग पक्षिभिर् आवृताम् ।
हर्म्य प्रासाद सम्बाधाम् कोकिल आकुल निह्स्वनाम् ॥५-१५-३॥

पूरा अध्याय