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वाल्मीकि रामायण 15.26

सुख अर्हाम् दुह्ख सम्तप्ताम् व्यसनानाम् अकोदिवाम् ।
ताम् समीक्ष्य विशाल अक्षीम् अधिकम् मलिनाम् कृशाम् ॥५-१५-२६॥

पूरा अध्याय