ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1515.23वाल्मीकि रामायण 15.23अश्रु पूर्ण मुखीम् दीनाम् कृशाम् अननशेन च । शोक ध्यान पराम् दीनाम् नित्यम् दुह्ख परायणाम् ॥५-१५-२३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय