ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1515.21वाल्मीकि रामायण 15.21पीतेन एकेन सम्वीताम् क्लिष्टेन उत्तम वाससा । सपन्काम् अनलम्काराम् विपद्माम् इव पद्मिनीम् ॥५-१५-२१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय