ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1313.62वाल्मीकि रामायण 13.62ध्रुवम् तु रक्षो बहुला भविष्यति वन आकुला । अशोक वनिका चिन्त्या सर्व सम्स्कार सम्स्कृता ॥५-१३-६२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय