ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1313.44वाल्मीकि रामायण 13.44सम्यग् आपः प्रवेक्ष्यामि न चेत् पश्यामि जानकीम् । सुजात मूला सुभगा कीर्ति माला यशस्विनी ॥५-१३-४४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय